हरिद्वार। उत्तराखंड में सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक सौहार्द और संतुलित विकास की दिशा में कार्यरत पर्वतीय–मैदानी एकता समिति आज एक महत्वपूर्ण पहल करी । मंच द्वारा 16 नवंबर को दोपहर 2 बजे, हरिद्वार के हर की पौड़ी से ललतारा पुल तक भव्य ‘एकता पदयात्रा’ का आयोजन किया गया ।
इस पदयात्रा का उद्देश्य प्रदेश भर के नागरिकों को साथ लाकर यह संदेश देना है कि पहाड़ और मैदान के बीच कोई दूरी नहीं, बल्कि दोनों ही उत्तराखंड की साझा आत्मा और पहचान हैं। समिति का मानना है कि प्रदेश का विकास तभी संभव है जब हर नागरिक—चाहे वह पहाड़ी हों या मैदानी—समान भावना और समान अवसरों के साथ आगे बढ़े।
एकता, समरसता और शहीदों के सपनों का सम्मान
पर्वतीय–मैदानी एकता समिति ने कहा कि उत्तराखंड, जो अपनी आध्यात्मिकता और पवित्रता के लिए जाना जाता है, वहां अलगाववादी सोच, नफरत या भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
समिति ने स्पष्ट किया कि समान विकास, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक सम्मान ही राज्य निर्माण आंदोलन के अमर शहीदों के सपनों को साकार करने का मार्ग है।
पदयात्रा से उठने वाला संदेश
इस ऐतिहासिक पदयात्रा की थीम “एक साथ चलें, आगे बढ़ें” और “एक स्वर से मिलकर बोलें” रखी गई है।
मंच का मुख्य संदेश है—
“पहाड़ी–मैदानी एक थे, एक हैं और एक रहेंगे।”
प्रतिभागियों का कहना है कि कुछ ताकतें दोनों क्षेत्रों के बीच दूरियां बढ़ाने का प्रयास करती हैं, लेकिन उत्तराखंड की जनता इन प्रयासों को कभी सफल नहीं होने देगी। पदयात्रा का उद्देश्य इसी अटूट एकता को और मजबूत करना है, ताकि एक खुशहाल, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण संभव हो सके।
जनता से जुड़ने का आह्वान
मंच ने सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से इस पदयात्रा में शामिल होने की अपील की है, ताकि पूरे राज्य में एकजुटता और भाईचारे का एक मजबूत संदेश स्थापित हो सके।
इस पदयात्रा में समिति के अध्यक्ष पी के अग्रवाल, राजेंद्र पराशर, किरण सिंह, लक्ष्मी अग्रवाल, अनीता तिवारी, सुरेन्द्र ठाकुर, पवन ठाकुर, अरुणा शर्मा समेत अनेक पदाधिकारी व् गणमान्य उपस्थित थे ।

