विशेष संवाददाता, उत्तरकाशी:
उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध चारधामों में से एक माँ यमुनोत्री धाम के कपाट इस वर्ष 23 अक्टूबर 2025 (भाई दूज) के दिन शीतकालीन अवकाश के लिए विधिवत बंद किए जाएंगे। मंदिर समिति द्वारा विजयदशमी के दिन पंचांग गणना और धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह तिथि घोषित की गई है।
हर वर्ष की भांति इस बार भी शीतकाल की शुरुआत से पहले कपाट बंद किए जाएंगे और माँ यमुना की उत्सव डोली को शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गाँव ले जाया जाएगा। वहाँ अगले छह माह तक पूजा-अर्चना विधिवत जारी रहेगी।
30 अप्रैल को खुले थे कपाट
माँ यमुनोत्री धाम के कपाट इस वर्ष 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भक्तों के दर्शन हेतु खोले गए थे। तब से अब तक लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री धाम पहुँचकर माँ यमुना के दर्शन कर चुके हैं। मंदिर समिति एवं प्रशासन के अनुसार इस वर्ष यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
बंदी तिथि: धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न होगा कार्यक्रम
कपाट बंद होने की प्रक्रिया परंपरागत वैदिक विधियों के अनुसार संपन्न होगी। सुबह विशेष पूजा, हवन एवं पंचोपचारों के बाद माँ यमुना की मूर्ति को डोली में विराजमान किया जाएगा। इसके उपरांत भव्य शोभायात्रा के साथ डोली को खरसाली के लिए प्रस्थान कराया जाएगा, जहाँ आगामी अप्रैल तक माँ यमुना की पूजा जारी रहेगी।
प्रशासन की अपील: समय से पहले यात्रा पूरी करें
धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे 23 अक्टूबर से पूर्व ही अपनी यात्रा पूर्ण कर लें। अक्टूबर माह में ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अचानक खराब हो सकता है, जिससे मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना रहती है।
धाम बंद होने के प्रमुख कारण
कठोर शीतकालीन मौसम: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से ही इस क्षेत्र में बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे यात्रा असुरक्षित हो जाती है।
सुरक्षा एवं स्वास्थ्य: अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी और दुर्गम मार्गों के कारण तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
परंपरा अनुसार नियम: सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट भाई दूज को बंद होते हैं।
चारधाम यात्रा की समापन चरण में प्रवेश
माँ यमुनोत्री के साथ-साथ निकट भविष्य में गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों के भी कपाट क्रमशः बंद होने लगेंगे। इससे पहले श्रद्धालु इन दिव्य धामों के दर्शन का पुण्य लाभ उठा सकें, इसके लिए प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द दर्शन हेतु योजना बनाएं।
📌 विशेष जानकारी:
माँ यमुना की शीतकालीन पूजा खरसाली गाँव के मंदिर में संपन्न होती है, जो यमुनोत्री धाम से पैदल मार्ग द्वारा कुछ ही दूरी पर स्थित है। यहाँ भी भक्तजन पूजा कर सकते हैं।

