देहरादून, 7 अक्टूबर 2025 — देहरादून के राजकीय प्राथमिक विद्यालय टी‑स्टेट, बंजारावाला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ शिक्षिका और स्कूल प्रशासन पर बच्चों से मजदूरी करवाने का आरोप लगा है। एक वायरल वीडियो ने इस विवाद को हवा दी है और शिक्षा विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
वायरल वीडियो ने उठाए सवाल
सोमवार दोपहर का समय था, जब कुछ माता-पिता और स्थानीय नागरिकों ने रिपोर्ट किया कि स्कूल की ओर से बच्चों को बजरी (छोटे-छोटे पत्थर) भरकर तसलों में ले जाने का काम कराया जा रहा है। वीडियो में आठ से दस बच्चे दिखाई दे रहे हैं, जो सड़क किनारे से बजरी भरकर सिर पर तसले लेकर स्कूल की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
प्रधानाध्यापिका अंजू मेनादुली को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही गई है।
प्रधानाध्यापिका का बयान है कि बच्चों ने स्वयं यह कार्य करने की इच्छा ज़ाहिर की थी, क्योंकि कुछ शिक्षक अनुपस्थित थे और गाँव से बजरी विद्यालय तक लाने की समस्या वर्षों से बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली, उन्होंने छात्रों को काम रोकने और वापस विद्यालय लौटने के लिए कहा।
लेकिन अभिभावकों और समाज का कहना है कि यह शिक्षकों द्वारा बच्चों का दुरुपयोग है, और सिर्फ प्यार या “मदद” कहकर इस तरह की अमानवीय गतिविधि को जायज़ नहीं ठहराया जाना चाहिए।
कानूनी और नैतिक दृष्टिकोण
बालश्रम निषेध अधिनियम, 1986 और भारत का संविधान बच्चों को किसी भी प्रकार की अवैध मजदूरी से बचाने का आदेश देते हैं।
शिक्षा संस्थानों का कर्तव्य है कि वे बच्चों को शिक्षा दें, न कि उन पर काम करवाएँ।
इस तरह की घटनाएँ बच्चों में शारीरिक, मानसिक व आत्मसम्मान को चोट पहुँचाती हैं।
इसके अलावा, शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही बनती है कि वे इस प्रकार की घटनाओं की जड़ तक पहुँचें और पुनरावृत्ति रोकें।

