देहरादून | 12 फरवरी 2026
दुकानदारों और डिजाइनरों पर खरीद का दबाव!
शहर में हाल ही में कई दुकानदारों और ग्राफिक डिजाइनरों ने आरोप लगाया है कि कुछ सॉफ्टवेयर कंपनियों के प्रतिनिधि उनके पास आकर दावा कर रहे हैं कि वे उनके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं और अब उन्हें उसका लाइसेंस खरीदना होगा।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब संबंधित दुकानदारों ने कहा कि जिस सॉफ्टवेयर की बात की जा रही है, उसका क्रैक वर्ज़न पहले से ही इंटरनेट पर उपलब्ध है। उनका सवाल है कि अगर कंपनी अपने सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को लेकर गंभीर थी, तो वह अवैध (क्रैक) वर्ज़न ऑनलाइन उपलब्ध कैसे हो गया?
दुकानदारों की प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कई बार उन्हें यह पता ही नहीं होता कि सॉफ्टवेयर का वर्ज़न वैध है या नहीं, खासकर जब वह किसी थर्ड-पार्टी तकनीशियन द्वारा इंस्टॉल किया गया हो। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियाँ पहले नोटिस देकर फिर भारी जुर्माना या लाइसेंस फीस मांगती हैं, जिससे छोटे व्यवसायों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
क्या जबरदस्ती वसूली सही है?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, किसी भी कंपनी को सीधे धमकाने या जबरदस्ती पैसे वसूलने का अधिकार नहीं है। यदि लाइसेंस उल्लंघन हुआ है तो उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए — जैसे लिखित नोटिस, प्रमाण और समझौते का विकल्प।

