विरेश कुमार-देहरादून
बद्रीनाथ धाम : उत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरे मंदिर परिसर में “जय बद्री विशाल” के जयकारों की गूंज सुनाई दी और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कपाटोद्घाटन के शुभ अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धाम में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
कपाट खुलने से पहले मंदिर को करीब 25 क्विंटल गेंदा फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे पूरा धाम दुल्हन की तरह सजा नजर आया। सुबह मुख्य पुजारी, धर्माधिकारी और वेदपाठियों ने विशेष पूजा-अर्चना की। परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी की मूर्ति को गर्भगृह से निकालकर लक्ष्मी मंदिर में विराजमान किया गया, जबकि भगवान कुबेर और उद्धव जी को गर्भगृह में स्थापित किया गया।
इस दौरान माणा और बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक जागरों के साथ झुमैलो नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भी बिखेरे। वहीं श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर अपनी आस्था प्रकट की।

चारधाम यात्रा के इस प्रमुख पड़ाव के साथ ही यात्रा ने पूर्णता प्राप्त कर ली है। प्रशासन और पुलिस की ओर से यात्रा मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
बद्रीनाथ धाम की विशेष परंपरा के अनुसार शीतकाल में देवताओं द्वारा पूजा की जाती है, जबकि कपाट खुलने के बाद ग्रीष्मकाल में मानवों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है। कपाट खुलने के साथ ही अब अगले छह महीने तक श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर सकेंगे।

