नई दिल्ली/कोलकाता/लखनऊ। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश के अलग-अलग हवाई अड्डों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। ये गिरफ्तारियां कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से की गईं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कार्रवाई एक संभावित सीमा-पार आतंकी नेटवर्क को समय रहते रोकने में अहम साबित हुई है।
टूरिस्ट वीजा पर आए, संवेदनशील इलाकों तक पहुंचे
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बाद में पूर्वोत्तर के संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर मिजोरम, में पहुंच गए। इन इलाकों में जाने के लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है। एजेंसियों को शक है कि वहां से इन्होंने अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया और भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों से संपर्क साधा।
ड्रोन और ट्रेनिंग से जुड़ा बड़ा खुलासा
अधिकारियों का कहना है कि ये लोग सिर्फ पर्यटक नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने और ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने में लगे थे। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पूर्वोत्तर में सक्रिय संगठनों को तकनीकी और सामरिक रूप से मजबूत करने की साजिश मानी जाएगी। खासकर ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मैथ्यू वैनडाइक केंद्र में
इस पूरे मामले के केंद्र में मैथ्यू वैनडाइक का नाम सामने आया है। वह पहले भी दुनिया के कई संघर्ष क्षेत्रों—जैसे लीबिया, इराक और यूक्रेन—से जुड़ा रहा है। 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान वह चर्चा में आया था, जब उसे कथित तौर पर विद्रोहियों के साथ लड़ते हुए पकड़ा गया था। वह खुद को “फ्रीडम फाइटर” और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर बताता रहा है।
UAPA के तहत सख्त कार्रवाई
NIA ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल सभी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां इस नेटवर्क के फंडिंग स्रोत, संपर्क और काम करने के तरीके का पता लगाने में जुटी हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल
मामले के अंतरराष्ट्रीय पहलू भी सामने आए हैं। अमेरिका ने अपने नागरिक से जुड़े मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है, जबकि यूक्रेन ने अपने नागरिकों से मिलने की अनुमति मांगी है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्षों में विदेशी नागरिकों की भागीदारी बढ़ रही है, खासकर म्यांमार से सटे इलाकों में। कमजोर सीमा सुरक्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं।
आगे की जांच अहम
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के पीछे की साजिश, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को उजागर करने की कोशिश करेंगी। यह मामला भविष्य में भारत और अन्य देशों द्वारा ऐसे विदेशी तत्वों के खिलाफ अपनाई जाने वाली रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

